ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा में हुए दर्दनाक पीजी अग्निकांड के बीच कुछ ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने का साहस दिखाया। निर्माणाधीन इमारत में काम कर रहीं गौरी, आसमा, रवि शाक्य और ठेकेदार सुबेद आलम ने सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देते हुए महज 15 मिनट में 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
आग के बीच दिखी इंसानियत की मिसाल
घटना के समय निर्माणाधीन इमारत की छत पर काम कर रही मजदूर गौरी ने बताया कि जैसे ही पास स्थित पीजी में आग लगी, वहां फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए छत पर पहुंच गए। चारों तरफ चीख-पुकार और धुएं का गुबार था। मासूम बच्चों की चीखें सुनकर सभी कामगार तुरंत मदद के लिए आगे आए।ठेकेदार सुबेद आलम और रवि शाक्य की मदद से निर्माणाधीन इमारत और पीजी के बीच सीढ़ी लगाई गई। इसके बाद लोहे की ग्रिल से रस्सी बांधकर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया गया, जिसके सहारे लोगों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।
तीन फीट के रास्ते से किया मौत को मात
कामगारों के अनुसार, दोनों इमारतों के बीच करीब तीन फीट का बेहद खतरनाक रास्ता था। जरा सी चूक किसी की भी जान ले सकती थी। इसके बावजूद सभी ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार लोगों को सुरक्षित निकालते रहे। करीब 15 मिनट के भीतर 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
ई-बाइक की बैटरी फटने से लगी आग
प्रत्यक्षदर्शी दुकानदार अमन के मुताबिक, आग की शुरुआत ई-बाइक की चार्जिंग के दौरान बैटरी में हुए धमाके से हुई। देखते ही देखते आग ने ग्राउंड फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया। स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि एक तरफ जनरेटर रखा था, जबकि दूसरी ओर दोपहिया वाहन खड़े थे, जिससे लोगों के बाहर निकलने का रास्ता भी प्रभावित हुआ।
फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे
घटना के बाद सामने आया कि पीजी में अग्निशमन से जुड़े बुनियादी इंतजाम भी नहीं थे। वहां न तो पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर थे और न ही अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीजी अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। हादसे के बाद लगभग 81 लोगों को अपना जला हुआ सामान समेटकर दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ा।
फायर कर्मियों ने भी बचाईं कई जानें
घटना के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने भी राहत एवं बचाव अभियान चलाया। अग्निशमन कर्मी निजामुद्दीन, अंशुल, राजकुमार और वैकुंठ सहित अन्य कर्मचारियों ने जोखिम उठाकर 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
पुलिस पर लगे संवेदनहीनता के आरोप
हादसे के बाद एक युवक ने दावा किया कि वह मृतका स्नेहा का भाई है और अपना सामान निकालने की अनुमति मांग रहा था। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। हालांकि, डीसीपी सेंट्रल शैलेंद्र कुमार ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि युवक सुरक्षा घेरे के भीतर जबरन जाने की कोशिश कर रहा था। उसे केवल सुरक्षा कारणों से कुछ देर इंतजार करने के लिए कहा गया था।
नोएडा पीजी अग्निकांड ने एक बार फिर अवैध पीजी, फायर सेफ्टी में लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस भयावह हादसे के बीच मजदूरों और फायर कर्मियों की बहादुरी ने दर्जनों लोगों को नई जिंदगी दी। उनकी सूझबूझ और साहस इस घटना की सबसे प्रेरणादायक कहानी बनकर सामने आई।
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